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असम विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव अधिकारियों से ‘चूक’

असम विधानसभा चुनाव
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नई दिल्‍ली: कुछ दिन पहले इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की हैंडलिंग को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े हुए। असम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के बाद, बीजेपी के एक प्रत्‍याशी की कार से ईवीएम मिलीं। विपक्षी दलों ने इसे लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और लोकतांत्रिक सिस्‍टम को छिन्‍न-भिन्‍न करने का आरोप मढ़ा। चुनाव आयोग ने कहा कि पोलिंग पार्टी की गाड़ी का एक्‍सीडेंट हो गया जिसके बाद वहां से गुजरने वाली एक गाड़ी से मदद ली गई।

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पोलिंग पार्टी ने वह गाड़ी किसकी है, यह चेक नहीं किया। आगे जाकर भीड़ ने गाड़ी को घेर लिया। आरोप था कि गाड़ी पथरकंडी से बीजेपी प्रत्‍याशी कृष्‍णेंदु पॉल की है और EVMs को छेड़छाड़ के लिए ले जाया जा रहा है। आयोग ने पाया कि ईवीएम की सील नहीं टूटी है। इसके बाद सभी आइटम्‍स को स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचा दिया। EVM के चुनाव पूर्व और बाद में हैंडलिंग को लेकर आयोग की स्‍पष्‍ट गाइडलाइंस हैं, जिनका पालन हर चुनाव अधिकारी को करना होता है।

जब इलेक्‍शन न हों तो…

किसी जिले में मौजूद सभी EVMs आमतौर पर ट्रेजरी या वेयरहाउस में सीधे जिला निर्वाधन अधिकारी के नियंत्रण में रखी जाती हैं। अपवाद हैं लेकिन वह जगह तहसील स्‍तर से नीचे नहीं होनी चाहिए। वेयरहाउस में डबल लॉक रहता है और चौबीसों घंटे पहरेदारी होती है। सीसीटीवी सर्विलांस भी होता है। जब चुनाव नहीं चल रहे होते तो भी बिना चुनाव आयोग की अनुमति के EVMs को इधर-उधर नहीं किया जा सकता है।

असम में EVM को लेकर क्‍या विवाद हुआ

जब चुनाव करीब होते हैं तो EVMs को रैंडमली अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के लिए अलॉट कर दिया जाता है। एक सॉफ्टवेयर के जरिए यह कवायद राजनी‍तिक दलों के लोगों की मौजूदगी में होती है। अगर प्रतिनिधि मौजूद न हों तो अलॉटेड EVMs और VVPAT मशीनों की लिस्‍ट पार्टी कार्यालय से साझा की जाती है। इसके बाद EVMs का जिम्‍मा उस क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी का होता है जो इन्‍हें स्‍ट्रॉन्‍ग रूम्‍स में रखवाते हैं।

एक बार फिर से पार्टी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में EVMs को पोलिंग सेंटर भेजा जाता है। सभी मशीनों में उम्‍मीदवारों के नाम और चुनाव चिन्‍ह डालने के बाद स्‍ट्रॉन्‍ग रूम को फिर सील कर दिया जाता है। अगर पार्टी प्रतिनिधि चाहें तो सील पर अपनी मुहर भी लगा सकते हैं। स्‍ट्रॉन्‍ग रूम की निगरानी एक सीनियर पुलिस अधिकारी (डीएसपी या उससे ऊपर रैंक) के नेतृत्‍व में होती है। कई जगह केंद्रीय बल भी स्‍ट्रॉन्‍ग रूम की सुरक्षा में तैनात होते हैं।

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