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क्या वैक्सीन लगने से पहले सरकारें बच्चों को स्कूल बुला जल्दबाजी कर रही हैं?

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नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस का प्रकोप ज्यों-ज्यों कम हो रहा है, त्यों-त्यों राज्य सरकारें स्कूल खोलने के फैसले भी ले रही हैं। बिहार और पंजाब में क्रमशः 4 और 7 जनवरी से स्कूल खुल गए तो राजस्थान सरकार ने भी 18 जनवरी से स्कूल-कॉलेज समेत सारे कोचिंग संस्थान भी खोलने की अनुमति दे दी है। लेकिन, हर राज्य से स्कूलों में बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों के कोरोना पॉजिटिव मिलने की खबरों ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सरकारें कोविड-19 महामारी के खिलाफ टीकाकरण अभियान शुरू होने से पहले स्कूल खोलने में जल्दबाजी दिखा रही हैं? सवाल यह है कि क्या कोरोना टीका लगाए बिना बच्चों के संक्रमित होने का जोखिम उठाना उचित है? ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि बड़ी संख्या में अभिभावकों को अब भी डर सता रहा है कि कहीं उनके बच्चे स्कूल जाकर कोविड-19 महामारी को न्योता न दे दें।

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मुंगेर में एक ही स्कूल के 22 बच्चों के संक्रमित मिलने से हड़कंप

बिहार में मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड अंतर्गत ममई गांव स्थित लाल बहादुर शास्त्री किसान उच्च विद्यापीठ के 22 बच्चे गुरुवार को कोरोना पॉजिटिव पाए गए। वहां स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर ऐंटीजन टेस्ट किया था जिसमें 22 बच्चों के अलावा दो शिक्षक और एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी भी कोरोना संक्रिमत पाए गए।

उधर, एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, गया जिले में खिजरसराय प्रखंड के सरैया स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक ही कोरोना पॉजिटिव पाए गए। डीईओ मुस्तफा हुसैन मंसूरी ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव हेड मास्टर अभी पटना में रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल में इलाज करवा रहे हैं। उन्होंने बाकी शिक्षकों, कर्मचारियों और बच्चों से भी कोरोना टेस्ट करवाने का अनुरोध किया।

नवंबर में भी स्कूलों से आ रही थीं बुरी खबरें

इससे पहले भी जब नवंबर में पहले-पहल स्कूल खुलने शुरू हुए तो हर राज्य और तकरीबन हर जिले के किसी-न-किसी स्कूल से बच्चों के कोरोना संक्रमित पाए जाने की खबरें आती रहीं। आंध्र प्रदेश में स्कूलों को खुलने के बाद तीन दिनों में 262 छात्र और 160 टीचर कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। उत्तराखंड में भी स्कूल खुलने के 5 दिन बाद ही 6 नवंबर को 84 स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया था। यहां पौड़ी गढ़वाल जिले के 23 स्कूलों के 80 शिक्षकों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। हालांकि यहां पांच दिनों के लिए स्कूल बंद किए गए थे ताकि उन्हें साफ करके फिर से खोला जा सके।

वहीं, हरियाणा के तीन जिलों में 150 से अधिक स्कूली छात्रों के कोरोना पॉजिटिव निकलने की वजह से शैक्षिक संस्थानों को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि 9वीं से 12वीं के कोरोना संक्रमित सभी छात्रों की सेहत स्थिर है और उनमें से अधिकतर होम आइसोलेशन में हैं। रेवाड़ी जिले के 13 स्कूलों में 91 छात्र कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे जबकि जींद के कई स्कूलों में कुल 30 छात्र और 10 टीचरों को संक्रमण हुआ था। इसी तरह, मिजोरम में भी दो प्राइवेट स्कूलों में 15 स्कूली छात्र कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। संक्रमण के खतरे को देखते हुए मिजोरम सरकार ने सभी स्कूलों को बंद कर दिया था। यहां 16 अक्टूबर को 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए स्कूल खोले गए थे।

62% अभिभावकों ने स्कूल नहीं खोलने के पक्ष में

केंद्र सरकार ने जब पिछले साल 21 सितंबर से शर्तों के साथ स्कूल खोलने की अनुमति दी तो कई सर्वेक्षणों को जरिए अभिभावकों से राय ली गई। उनसे पूछा गया कि क्या स्कूल खुलने पर वो अपने बच्चों को भेजेंगे? तब दिल्ली-एनसीआर के केवल 31% अभिभावक ही स्कूल खोलने के पक्ष में अपनी राय दी थी जबकि 61% अभिभावक इस फैसले के खिलाफ रहे। हालांकि, उस वक्त दिल्ली में कोरोना वायरस का प्रकोप बहुत ज्यादा था। तब हिमाचल के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के 62% अभिभावकों ने स्कूल नहीं खोलने के पक्ष में थे। उधर, उत्तराखंड में भी अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने के सवाल पर अपनी अनिच्छा जाहिर की थी।

48 प्रतिशत अभिभावकों ने सिलेबस को आधा करने की मांग की

झारखंड सरकार ने भी इसी तरह का सर्वे कराया जिसमें भाग लेने वाले 31.7 प्रतिशत अभिभावकों ने स्पष्ट कहा कि वो बच्चों को स्कूल नहीं भेज सकते। वहीं, 48 प्रतिशत अभिभावकों ने सिलेबस को आधा करने की मांग की। ऑनलाइन सर्वे में 12वीं तक के छात्रों के 12,320 अभिभावकों ने हिस्सा लिया था जिनमें सरकारी स्कूलों के 5,204, केंद्रीय स्कूल के 933, सरकारी अनुदानित स्कूलों के 656, निजी स्कूलों के 5527 छात्रों के अभिभावकों ने अपनी राय दी थी।

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