उत्तराखंड

राज्य के सभी प्रमुख शहरों में शिल्प इंपोरियम किए जाएंगे स्थापित

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देहरादून: उत्तराखंड के हस्तशिल्प और अन्य उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग के लिए पेशेवर डिजायनरों की सेवाएं ली जाएंगी। साथ ही राज्य के सभी प्रमुख शहरों में शिल्प इंपोरियम स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के शासी निकाय की बैठक में इसके निर्देश दिए। उन्होंने परिषद के लिए एक करोड़ की अतिरिक्त धनराशि भी स्वीकृत की। परिषद को यह राशि रिवाल्विंग फंड के रूप में उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने ऊन के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ऊन क्लस्टर तैयार करने के निर्देश भी दिए।

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भीमल व पिरूल का हस्तशिल्प में विशेष उपयोग करने पर भी जोर दिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के उत्पादों को देश-दुनिया में विशिष्ट पहचान मिले। इसके लिए गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बांस, भीमल व पिरूल का हस्तशिल्प में विशेष उपयोग करने पर भी जोर दिया। साथ ही वन पंचायतों के माध्यम से रिंगाल उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए निर्देशित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने परिषद को एक करोड़ की अतिरिक्त धनराशि देने के प्रस्ताव पर भी स्वीकृति दी। रिवाल्विंग फंड के रूप में उपलब्ध होने वाली इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से शिल्पियों व बुनकरों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए किया जाएगा।

सचिव सचिन कुर्वे ने जानकारी दी कि

उन्होंने बताया गया कि पूर्व में परिषद के लिए एक करोड़ की राशि मंजूर की गई थी। सचिव सचिन कुर्वे ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार की एकीकृत हस्तशिल्प विकास एवं प्रोत्साहन योजना में चयनित विकासखंडों में दो माह की डिजाइन कार्यशाला, पांच माह की एकीकृत डिजाइन विकास कार्यशाला, टूल वितरण, बायर-सेलर मीट समेत अन्य आयोजनों से 50 हजार शिल्पियों को लाभान्वित किया गया। इनमें 14 हजार बुनकर शामिल है। उन्होंने बताया कि ऐंपण काष्ठकला, कलात्मक ऊन उत्पाद, प्राकृतिक रेशों से शिल्प के मद्देनजर सर्वे व अध्ययन की योजना दून विश्वविद्यालय के माध्यम से पूर्ण कर ली गई है।

विभिन्न जिलों में हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी

उन्होंने मानव संसाधन विकास योजना के तहत विभिन्न जिलों में हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी भी दी। यह भी बताया कि एकीकृत हस्तशिल्प विकास एवं प्रोत्साहन योजना में चयनित 15 ब्लाकों के सुविधा केंद्रों में जूट, काष्ठ, रिगाल, ऐंपण, ऊन, ताम्र, कार्पेट, ब्लाक प्रिटिंग आदि से जुड़ी मशीनों व उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है।

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