उत्तराखंड

ईश्वर नहीं, मगर उससे कम भी नहीं हैं भोले महाराज और माता मंगला जी

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भोले महाराज और माता मंगला के बिना अधूरा है उत्तराखंड के विकास का सपना 

नर सेवा ही है नारायण सेवा है भोले महाराज और माता मंगला की सोच  

राजेन्द्र जोशी 
क्या आपने कभी ईश्वर के साक्षात दर्शन किए हैं शायद नहीं लेकिन आज हम ऐसे संत दंपत्ति की बात करने जा रहे हैं जो इस मानव जीवन में नर सेवा को नारायण सेवा मानकर दिनरात सेवा के कार्य में जुटे हुए हैं और जो ईश्वर तो नहीं, लेकिन ईश्वर से कम भी नहीं हैं। हम बात कर रहे है भोले महाराज और माता मंगला जैसे संत महापुरूषों की, जिनका हमारे देश में होना और हमारे प्रदेश का होना हम सब के लिए गर्व की बात है। वहीं, उत्तराखंड राज्य की बात करें तो कोई पीड़ित हो, परेशान हो या कोई भी आपात स्थिति हो, आप एक बार इन स्थितियों में भोले महाराज और माता मंगला के पास चले आइए। आपकी हर समस्या इनके आशीर्वाद से हल हो जाऐगी…इसी लिए तो उत्तराखंड के लोग कहते हैं आपको ना तो हमारे वोट से सरोकार है और ना राजनीति की दरकार है, हम गरीबों की तो आप ही सरकार हैं। 

सरकार विवश नज़र आती है जहां, वहां से आगे शुरू होता है हंस फाउंडेशन का काम 

हंस महाराज की प्रेरणा से धर्मार्थ कार्यों को बढ़ावा देने के लिए ही भोले महाराज ने वर्ष 2009 में हंस फाउंडेशन नाम का एक पंजीकृत सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट की स्थापना की। तब से लेकर वर्तमान तक पूरे भारतभर के 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 400 से ज्यादा संस्थाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10 मिलियन की भारी भरकम धनराशि से निर्धन लोगों को लाभान्वित कर चुके हैं। फाउंडेशन की स्थापना स्वास्थ्य, शिक्षा, विकलांगता, पलायन, जल संरक्षण और आजीविका के क्षेत्रों में विकास कार्यक्रमों के लिए धन सहायता प्रदान के उद्धेश्यों को ध्यान में रखकर की गई है।
यहां यह भी कहा जाता है कि जहां सरकार विवश नज़र आती है वहां से आगे हंस फाउंडेशन का काम शुरू होता है। उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों को जितना कुछ हंस फाउंडेशन ने दिया है वह सरकार भी नहीं कर सकती।  उत्तराखंड के चारों धामों में स्वास्थ सुविधाओं सहित बद्रीनाथ और केदारनाथ तक जैसे दुर्गम इलाकों में आईसीयू ,वेंटिलेटर और ऑपरेशन थियेटर तक फाउंडेशन द्वारा स्थापित किया गया है जो तीर्थ यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। बद्रीनाथ में तो अत्याधुनिक स्वस्थ्य सुविधाओं से सुसज्जित हॉस्पिटल तक फाउंडेशन से बनाया है।  
उत्तराखंड के होने के नाते भोले जी महाराज और माता मंगला जी का उत्तराखंड राज्य में हर संभव विकास में इनका बढ़चढ़कर योगदान मिलता रहा है तब चाहे यहां सरकार किसी भी राजनीतिक दल की क्यों न हो। इसका उदाहरण वर्ष 2016 में माता मंगला को राज्य सरकार द्वारा दिया गया ‘उत्तराखंड रत्न’ अवाॅर्ड है। उस दौरान माता मंगला ने अवाॅर्ड के साथ मिली पांच लाख रूपए की पुरस्कार राशि में छह लाख अपनी ओर से जोड़कर मुख्यमंत्री कोष में 11 लाख रूपए जमा कराए थे।
आइए एक नजर डालते हैं भोले महाराज और माता मंगला द्वारा उत्तराखंड को दिए गए योगदान पर…

कोरोना काल में हंस फाउंडेशन बना फ्रंट लाइन वाॅरियर्स

कोरोना काल में अपने जन्मदिन के मौके पर हंस फाउंडेशन ने फ्रंट लाइन वाॅरियर्स की भूमिका निभाई है। फाउंडेशन के संस्थापक भोले महाराज ने अपने जन्मदिन के मौके पर 100 करोड़ रूपए की सौगात राज्य को दी। इस धनराशि से राज्य के पौड़ी जिले के लवाड़ में ‘नेशनल स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ का निर्माण, कोविड-19 से लड़ने के लिए उत्तराखंड में 10 कोविड टेस्टिंग सेंटरों की स्थापना, विद्यालय रथ योजना के तहत उत्तराखंड के चार विद्यालयों के लिए बसें, शिक्षा अभियान के तहत उत्तराखंड स्थित कई राजकीय महाविद्यालों में पुस्तकालयों के नवीनीकरण, जीवन रक्षक अभियान के तहत जिला अस्पताल टिहरी, रूद्रप्रयाग और भारत माता मंदिर हरिद्वार को एम्बुलेंस दी गई।
100 करोड़ रूपए की धनराशि के अलावा कोविड-19 से लड़ने को प्रधानमंत्री राहत कोष में 4 करोड़ जबकि मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ 51 लाख रूपये की राशि भी फाउंडेशन दे चुका है। इसके अलावा हंस फाण्डेशन द्वारा कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए उत्तराखंड के 250 गैर सरकारी विद्यालयों के स्टाफ को 15 दिनों का वेतन देने, महिला पुलिस बल को सक्षम बनाने की योजना के अतंर्गत नैनीताल महिला पुलिस बल को शीघ्र ही दुपहिया वाहन प्रदान करने, उत्तरकाशी के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों के सैकड़ों परिवारों के जीवन में रोशनी की किरण पहुंचाने के लिए हंस ऊर्जा अभियान के तहत सोलर लाईट प्रदान की गई।

राज्यवासियों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में संजीवनी से कम नहीं है हंस फाउंडेशन

पौड़ी जिले में सतपुली शहर के पास करीब 10 एकड़ क्षेत्र में बसा हंस फाउंडेशन हॉस्पिटल हंस फाउंडेशन की ओर उत्तराखंड को किसी सौगात से कम नहीं है। इसके लोकार्पण के बाद से अब तक इस हॉस्पिटल से हज़ारों पर्वतीय इलाकों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहे  हैं। इतना ही नहीं इस क्षेत्र के लोगों के लिए चिकित्सा सेवाएं सब्सिडाइज्ड दरों पर और जरूरतमंद लोगों के लिए मुफ्त में भी उपलब्ध हैं। 150 बेड के इस मल्टिस्पेशियालिटी आधुनिक हॉस्पिटल का औपचारिक उद्घाटन नवम्बर 2017 में हुआ था।
इसमें डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्टाफ के रहने की भी सुविधा है। पौड़ी जिले के अंतर्गत सतपुली कस्बे के उन तमाम गांवों के लोगों के लिए यह चिकित्सा केंद्र जिले के सुदूरवर्ती इलाके के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवा दे रहा है इतना ही नहीं जो लोग अस्पताल तक आने तक का खर्च नहीं उठा पाते हैं ऐसे लोगों के गांव तक हॉस्पिटल बस रोगियों को नि:शुल्क लाने और ले जाने के लिए भी लगायीं गयीं हैं।
उत्तराखंड में आंखों की समस्याओं से जूझ रहे लोगों की सहायता को हंस फाउंडेशन हॉस्पिटल्स हरिद्वार में करीब चार एकड़ क्षेत्र में स्थापित है। यहां आंखों की सभी तरह की बीमारियों के कई ट्रीटमेंट, जैसे कि मोतियाबिंद और अन्य ऑपरेशन किये जाते हैं। दूर के गांवों और स्कूलों में कैंप लगाकर जिन लोगों को सर्जरी की जरूरत होती है उन्हें हरिद्वार लाया जाता है और ऑपरेशन के लिए उनके ठहरने का इंतजाम भी फाउंडेशन ही करता है। हंस फाउंडेशन आई केयर का लोकार्पण 30 जून, 2014 को हुआ था तभी से यह सूबे के नेत्र रोगियों की सेवा में लगा हुआ है।
हंस फाउंडेशन हॉस्पिटल्स ने कई मोबाइल हेल्थ क्लिनिक बनाए हैं जो कि जरूरी मेडिकल उरकरणों से फिट की हुई गाड़ियां हैं। ये गाड़ियां दूर-दराज के गांव -गांव में घूम-घूमकर जरूरी चिकित्सा-सेवाएं प्रदान करती हैं। इस सिस्टम के जरिए ऐसे दसियों हजार लोगों तक आधुनिक चिकित्सा सेवाएं पहुंच रही हैं, जिन्हें कहीं और से ये सुविधा नहीं मिलती। इनके अलावा विभिन्न अस्पतालों के लिए एंबुलेंस आदि की सुविधा मुहैया करना भी शामिल है। स्वास्थ्य के लिए राज्य के निवासी इन्हें सदैव स्मरण करेंगे। इतना ही नहीं विभिन्न गंभीर बीमारियों से ग्रसित रोगियों को दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे बड़े अस्पतालों से भी हंस फाउंडेशन का संपर्क है जहां ऐसे रोगियों जिनके इलाज पर लाखों रुपया खर्च होता है फाउंडेशन खर्चा करता है ताकि लोग स्वस्थ रहें।  

निर्धन बच्चों की शिक्षा के लिए सदैव तत्पर है हंस फाउंडेशन

भोले महाराज और माता मंगला के कार्यों के माध्यम से उत्तराखंड राज्य नयी ऊंचाईयों को छू रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य के मामले में दूसरे राज्यों के मुकाबले उत्तराखंड बहुत आगे बढ़ रहा है। यह सब इसलिए हो रहा हैं क्यों कि हमारे साथ हंस फाउंडेशन खड़ा है।
राज्य के विभिन्न जिलों के स्कूलों में अध्ययनरत छात्रों को आवागमन में दिक्कतें न हो। इसके लिए वर्ष 2019 में हंस फाउंडेशन के जरिए भोले महाराज और माता मंगला ने विभिन्न स्कूलों के लिए बस का इंतजाम किया। इन स्कूलों में श्री शेर सिंह कार्की सरस्वती विहार विद्यालय मुवानी, पिथौरागढ़, सरस्वती विद्यामंदिर उ.मा.वि.रामगढ़, नैनीताल, सरस्वती विद्यामंदिर इटंर कॉलेज जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल, सरस्वती शिशु मंदिर कालसी, देहरादून, सरस्वती शिशु मंदिर खेती खान चम्पावत, सरस्वती विद्यामंदिर इंटर कॉलेज पुरोला, उत्तरकाशी, सरस्वती शिशु मंदिर वाडेछीना अल्मोड़ा, महायोगी गुरू गोरखनाथ महाविद्याल, विध्याणी, यमकेश्वर पौड़ी गढ़वाल और शिंवागी इंटरनेशनल पब्लिक जूनियर हाईस्कूल पोखरी चमोली शामिल है।
मातृ छाया योजना के तहत उत्तराखंड के विभिन्न बालिका स्कूलों एवं छात्रावासों में सैनिटरी नेपकिंन बेंडिंग एवं डिस्पोजल मशीनों की स्थापना भी की है। इनमें राजकीय ग्रामीण नवोदय विद्यालय चिन्यालीसौड़ उत्तरकाशी ,राजकीय ग्रामीण नवोदय विद्यालय कोटाबाग नैनीताल, बालिका छात्रावास रौतू की बेली टिहरी गढ़वाल, बालिका छात्रावास कालसी जनपद देहरादून शामिल है। इसके अलावा हंस फाउंडेशन ने शिक्षा के क्षेत्र में राज्य के लिए अनेक ऐतिहासिक कार्य किए है। राज्य के छात्र इनके सहयोग को हमेशा याद करेंगे।

विकलांगता के लिए हंस फाउंडेशन का नजरिया

हंस फाउंडेशन ने 19 जुलाई 2018 को हैंडबुक रिलीज की। इसमें दिव्यांगों को दिव्यांग अधिकार अधिनियम-2016 की जानकारी और विधेयक के हर अध्याय को सरलता से बताना, जिससे कि वे इस जानकारी को अच्छे से समझकर इससे लाभ उठा सकें।

दिव्यांग अधिकार अधिनियम -2016 दिव्यांगों को अधिकार दिलाने के लिए चलाई जा रही मुहिम में यह एक उपलब्धि है। इसका कानून तो बन गया है, मगर किसी भी कानून का मकसद तभी हल हो सकता है जब उसके बारे में जागरूकता हो। इसी मकसद को पूरा करने के लिए हंस फाउंडेशन ने यह कदम उठाया है।

नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट फॉर डिस्एबल्ड पीपल के सहयोग से हंस फाउंडेशन ने एक हैंडबुक पब्लिश की है। इसमें दिव्यांग अधिकार अधिनियम-2016 के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। इससे दिव्यांग अपने अधिकारों के बारे में बेहद अहम जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं और लाभ उठा सकते हैं। हैंडबुक हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में प्रकाशित की गई है। हैंडबुक में दिव्यांग अधिकार अधिनियम -2016 से जुड़ी बातें बेहद सरल भाषा में लिखी गई हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जानकारी पहुंचे।